vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 150: श्रीहनुमान्जीके द्वारा भीमसेनको अपने विशाल रूपका प्रदर्शन और चारों वर्णोंके धर्मोंका प्रतिपादन
»
श्लोक 39
श्लोक
3.150.39
निग्रहानुग्रहै: सम्यग् यदा राजा प्रवर्तते।
तदा भवन्ति लोकस्य मर्यादा: सुव्यवस्थिता:॥ ३९॥
अनुवाद
जब राजा संयम और शालीनतापूर्वक अपनी प्रजा के साथ उचित व्यवहार करता है, तभी संसार की समस्त मर्यादा बनी रहती है ॥39॥
When the King behaves appropriately with his subjects through restraint and grace, then only all the decorum of the world is maintained. ॥ 39॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×