श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 150: श्रीहनुमान‍्जीके द्वारा भीमसेनको अपने विशाल रूपका प्रदर्शन और चारों वर्णोंके धर्मोंका प्रतिपादन  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  3.150.39 
निग्रहानुग्रहै: सम्यग् यदा राजा प्रवर्तते।
तदा भवन्ति लोकस्य मर्यादा: सुव्यवस्थिता:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
जब राजा संयम और शालीनतापूर्वक अपनी प्रजा के साथ उचित व्यवहार करता है, तभी संसार की समस्त मर्यादा बनी रहती है ॥39॥
 
When the King behaves appropriately with his subjects through restraint and grace, then only all the decorum of the world is maintained. ॥ 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)