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mahabharat 3.150.30: व्यापार करना, कर वसूलना, वाणिज्य, कृषि, गौपालन, भेड़-बकरी पालना तथा विद्या का अध्ययन और अध्यापन करना - इन धार्मिक कार्यों से द्विज सम्पूर्ण जगत् की रक्षा करते हैं॥ 30॥   |   mahabharat अध्याय 3.150: श्रीहनुमान‍्जीके द्वारा भीमसेनको अपने विशाल रूपका प्रदर्शन और चारों वर्णोंके धर्मोंका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 150: श्रीहनुमान‍्जीके द्वारा भीमसेनको अपने विशाल रूपका प्रदर्शन और चारों वर्णोंके धर्मोंका प्रतिपादन  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  3.150.30 
पण्याकरवणिज्याभि: कृष्यागोजाविपोषणै:।
विद्यया धार्यते सर्वं धर्मैरेतैर्द्विजातिभि:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
व्यापार करना, कर वसूलना, वाणिज्य, कृषि, गौपालन, भेड़-बकरी पालना तथा विद्या का अध्ययन और अध्यापन करना - इन धार्मिक कार्यों से द्विज सम्पूर्ण जगत् की रक्षा करते हैं॥ 30॥
 
Doing business, collecting taxes, commerce, agriculture, cow-rearing, rearing sheep and goats, and studying and teaching knowledge - by these religious pursuits the twice-born protect the entire world.॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)