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mahabharat 3.150.29: देवताओं की जीविका वेदविहित यज्ञों से चलती है और बृहस्पति तथा शुक्राचार्य द्वारा कही गई नीतियाँ मनुष्यों की जीविका का आधार हैं ॥29॥   |   mahabharat अध्याय 3.150: श्रीहनुमान‍्जीके द्वारा भीमसेनको अपने विशाल रूपका प्रदर्शन और चारों वर्णोंके धर्मोंका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.150.29 
वेदाचारविधानोक्तैर्यज्ञैर्धार्यन्ति देवता:।
बृहस्पत्युशन:प्रोक्तैर्नयैर्धार्यन्ति मानवा:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
देवताओं की जीविका वेदविहित यज्ञों से चलती है और बृहस्पति तथा शुक्राचार्य द्वारा कही गई नीतियाँ मनुष्यों की जीविका का आधार हैं ॥29॥
 
The livelihood of the gods is maintained through the yagyas prescribed by the Vedas and the policies stated by Brihaspati and Shukracharya are the basis for the livelihood of humans. 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)