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mahabharat 3.150.28: धर्म आचरण से उत्पन्न होता है। धर्म में वेदों की प्रतिष्ठा है। वेदों से ही यज्ञों का प्रादुर्भाव हुआ है और यज्ञों से ही देवताओं का अस्तित्व है॥28॥   |   mahabharat अध्याय 3.150: श्रीहनुमान‍्जीके द्वारा भीमसेनको अपने विशाल रूपका प्रदर्शन और चारों वर्णोंके धर्मोंका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 150: श्रीहनुमान‍्जीके द्वारा भीमसेनको अपने विशाल रूपका प्रदर्शन और चारों वर्णोंके धर्मोंका प्रतिपादन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  3.150.28 
आचारसम्भवो धर्मो धर्मे वेदा: प्रतिष्ठिता:।
वेदैर्यज्ञा: समुत्पन्ना यज्ञैर्देवा: प्रतिष्ठिता:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
धर्म आचरण से उत्पन्न होता है। धर्म में वेदों की प्रतिष्ठा है। वेदों से ही यज्ञों का प्रादुर्भाव हुआ है और यज्ञों से ही देवताओं का अस्तित्व है॥28॥
 
Religion is born from conduct. Vedas have prestige in religion. Yagyas have emerged from Vedas and gods exist because of yagyas.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)