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mahabharat 3.150.23: वहाँ जाकर स्वयं उसके फूल मत तोड़ना। मनुष्यों को देवताओं का विशेष आदर करना चाहिए। 23॥   |   mahabharat अध्याय 3.150: श्रीहनुमान‍्जीके द्वारा भीमसेनको अपने विशाल रूपका प्रदर्शन और चारों वर्णोंके धर्मोंका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 150: श्रीहनुमान‍्जीके द्वारा भीमसेनको अपने विशाल रूपका प्रदर्शन और चारों वर्णोंके धर्मोंका प्रतिपादन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.150.23 
न च ते तरसा कार्य: कुसुमावचय: स्वयम्।
दैवतानि हि मान्यानि पुरुषेण विशेषत:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
वहाँ जाकर स्वयं उसके फूल मत तोड़ना। मनुष्यों को देवताओं का विशेष आदर करना चाहिए। 23॥
 
Don't go there and start plucking its flowers yourself. Humans should especially respect the gods. 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)