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श्लोक  3.150.2 
वैशम्पायन उवाच
एवमुक्तस्तु भीमेन स्मितं कृत्वा प्लवंगम:।
तद् रूपं दर्शयामास यद् वै सागरलङ्घने॥ २॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं: हे जनमेजय! भीमसेन के ऐसा कहने पर हनुमानजी मुस्कुराये और उन्हें अपना वह रूप दिखाया जो उन्होंने समुद्र पार करते समय धारण किया था।
 
Vaishmpayana says: O Janamejaya! When Bhimasena said this, Hanuman smiled and showed him the form he had assumed when he crossed the ocean.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)