Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.150.19: परन्तु यदि सम्पूर्ण जगत को काँटे के समान दुःख देने वाला रावण मेरे हाथों मारा जाता, तो प्रभु श्री रामचन्द्रजी का यश नष्ट हो जाता। इसीलिए मैंने उसकी उपेक्षा की॥19॥ | mahabharat अध्याय 3.150: श्रीहनुमान्जीके द्वारा भीमसेनको अपने विशाल रूपका प्रदर्शन और चारों वर्णोंके धर्मोंका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
परन्तु यदि सम्पूर्ण जगत को काँटे के समान दुःख देने वाला रावण मेरे हाथों मारा जाता, तो प्रभु श्री रामचन्द्रजी का यश नष्ट हो जाता। इसीलिए मैंने उसकी उपेक्षा की॥19॥
But if Ravana, who gave pain to the entire world like a thorn, was killed by my hands, then the fame of Lord Shri Ramchandraji would have been destroyed. That's why I ignored him. 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥