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mahabharat 3.150.16: हे मरुपुत्र! तुम्हारे लिए कुछ भी असंभव नहीं है। रावण अपने सैनिकों सहित युद्धभूमि में अकेले तुम्हारा सामना करने में समर्थ नहीं था।॥16॥   |   mahabharat अध्याय 3.150: श्रीहनुमान‍्जीके द्वारा भीमसेनको अपने विशाल रूपका प्रदर्शन और चारों वर्णोंके धर्मोंका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 150: श्रीहनुमान‍्जीके द्वारा भीमसेनको अपने विशाल रूपका प्रदर्शन और चारों वर्णोंके धर्मोंका प्रतिपादन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.150.16 
न हि ते किंचिदप्राप्यं मारुतात्मज विद्यते।
तव नैकस्य पर्याप्तो रावण: सगणो युधि॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे मरुपुत्र! तुम्हारे लिए कुछ भी असंभव नहीं है। रावण अपने सैनिकों सहित युद्धभूमि में अकेले तुम्हारा सामना करने में समर्थ नहीं था।॥16॥
 
‘O son of Maru, nothing is impossible for you. Ravan along with his soldiers was not capable of facing you alone in the battlefield.'॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)