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mahabharat 3.15.9-12: भरतकुलभूषण! शास्त्रों के अनुसार द्वारकापुरी रक्षा के लिए सभी उत्तम उपायों से सुसज्जित थी। कुरुश्रेष्ठ! शत्रुओं का सामना करने में समर्थ गद, साम्ब और उद्धव आदि अनेक वीर नाना प्रकार के रथों द्वारा पुरी की रक्षा में लगे हुए थे। वे वीर रक्षक जो अत्यन्त प्रसिद्ध कुलों में उत्पन्न हुए थे और जिनका बल युद्ध के अवसरों पर सिद्ध हो चुका था, मध्य दुर्ग (नगर के मध्य दुर्ग) में स्थित होकर पुरी की पूर्णतः रक्षा कर रहे थे। उन्माद से सबको बचाने वाले उग्रसेन और उद्धव ने शत्रुओं का नाश करने की शक्ति रखने वाले घुड़सवारों को ध्वजाएँ दीं और सम्पूर्ण नगर में घोषणा करवा दी कि कोई भी मदिरापान न करे।   |   mahabharat अध्याय 3.15: सौभनाशकी विस्तृत कथाके प्रसंगमें द्वारकामें युद्धसम्बन्धी रक्षात्मक तैयारियोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 15: सौभनाशकी विस्तृत कथाके प्रसंगमें द्वारकामें युद्धसम्बन्धी रक्षात्मक तैयारियोंका वर्णन  »  श्लोक 9-12
 
 
श्लोक  3.15.9-12 
शास्त्रदृष्टेन विधिना सुयुक्ता भरतर्षभ।
रथैरनेकैर्विविधैर्गदसाम्बोद्धवादिभि:॥ ९॥
पुरुषै: कुरुशार्दूल समर्थै: प्रतिवारणे।
अतिख्यातकुलैर्वीरैर्दृष्टवीर्यैश्च संयुगे॥ १०॥
मध्यमेन च गुल्मेन रक्षिभि: सा सुरक्षिता।
उत्क्षिप्तगुल्मैश्च तथा हयैश्च सपताकिभि:॥ ११॥
आघोषितं च नगरे न पातव्या सुरेति वै।
प्रमादं परिरक्षद्भिरुग्रसेनोद्धवादिभि:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
भरतकुलभूषण! शास्त्रों के अनुसार द्वारकापुरी रक्षा के लिए सभी उत्तम उपायों से सुसज्जित थी। कुरुश्रेष्ठ! शत्रुओं का सामना करने में समर्थ गद, साम्ब और उद्धव आदि अनेक वीर नाना प्रकार के रथों द्वारा पुरी की रक्षा में लगे हुए थे। वे वीर रक्षक जो अत्यन्त प्रसिद्ध कुलों में उत्पन्न हुए थे और जिनका बल युद्ध के अवसरों पर सिद्ध हो चुका था, मध्य दुर्ग (नगर के मध्य दुर्ग) में स्थित होकर पुरी की पूर्णतः रक्षा कर रहे थे। उन्माद से सबको बचाने वाले उग्रसेन और उद्धव ने शत्रुओं का नाश करने की शक्ति रखने वाले घुड़सवारों को ध्वजाएँ दीं और सम्पूर्ण नगर में घोषणा करवा दी कि कोई भी मदिरापान न करे।
 
Bharatkulbhushan! According to the scriptures, Dwarkapuri was equipped with all the best measures for protection. Kurushrestha! Many brave men like Gad, Samb and Uddhava, who were capable of facing the enemies, were engaged in the protection of Puri with numerous chariots of various types. Those brave guards who were born in very famous clans and whose strength had been proved on the occasions of war, were stationed in the middle fort (central fort of the city) and were completely protecting Puri. Ugrasen and Uddhava, who saved everyone from madness, gave flags to the horsemen who had the power to destroy the enemies and announced in the entire city that no one should consume alcohol. 9-12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)