श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 15: सौभनाशकी विस्तृत कथाके प्रसंगमें द्वारकामें युद्धसम्बन्धी रक्षात्मक तैयारियोंका वर्णन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.15.4 
तत्रस्थोऽथ महीपालो योधयामास तां पुरीम्।
अभिसारेण सर्वेण तत्र युद्धमवर्तत॥ ४॥
 
 
अनुवाद
उस पर रहकर राजा शाल्व ने द्वारकापुरी के लोगों के साथ युद्ध किया। वहाँ घोर युद्ध चल रहा था और चारों ओर से अस्त्र-शस्त्रों का प्रयोग हो रहा था।
 
Staying on it, King Shalva fought with the people of Dwarakapuri. A huge battle was going on there and weapons were being used from all directions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)