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mahabharat 3.15.22: ऐसा कोई सैनिक नहीं था जिसे वेतन के रूप में सोना-चाँदी या ताँबा आदि मिलता हो, या जिसे समय पर वेतन न मिलता हो। ऐसा कोई सैनिक नहीं था जिसे दया करके सेना में भर्ती किया गया हो, और ऐसा कोई भी न था जिसकी वीरता बहुत समय से दिखाई न देती हो।   |   mahabharat अध्याय 3.15: सौभनाशकी विस्तृत कथाके प्रसंगमें द्वारकामें युद्धसम्बन्धी रक्षात्मक तैयारियोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.15.22 
न कुप्यवेतनी कश्चिन्न चातिक्रान्तवेतनी।
नानुग्रहभृत: कश्चिन्न चादृष्टपराक्रम:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कोई सैनिक नहीं था जिसे वेतन के रूप में सोना-चाँदी या ताँबा आदि मिलता हो, या जिसे समय पर वेतन न मिलता हो। ऐसा कोई सैनिक नहीं था जिसे दया करके सेना में भर्ती किया गया हो, और ऐसा कोई भी न था जिसकी वीरता बहुत समय से दिखाई न देती हो।
 
There was no soldier who was paid in gold and silver or copper etc. as salary or who did not receive his salary on time. No soldier was recruited in the army out of pity and there was no one whose valour had not been seen for a long time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)