vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 149: हनुमान्जीके द्वारा चारों युगोंके धर्मोंका वर्णन
»
श्लोक 6
श्लोक
3.149.6
न तच्छक्यं त्वया द्रष्टुं रूपं नान्येन केनचित्।
कालावस्था तदा ह्यन्या वर्तते सा न साम्प्रतम्॥ ६॥
अनुवाद
‘भैया! वह रूप तुम्हें नहीं दिखता, दूसरा कोई भी उसे नहीं देख सकता। उस समय की स्थिति भिन्न थी, अब वह नहीं है।॥6॥
‘Bhaiya! You cannot see that form, no other person can see it either. The condition at that time was different, it is not there now.॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×