श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 149: हनुमान‍्जीके द्वारा चारों युगोंके धर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  3.149.40 
एतत् ते सर्वमाख्यातं यन्मां त्वं परिपृच्छसि।
युगसंख्यां महाबाहो स्वस्ति प्राप्नुहि गम्यताम्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
महाबाहो! तुमने मुझसे युगों की संख्या के विषय में जो प्रश्न पूछा था, उसके उत्तर में मैंने ये सब बातें तुम्हें बताई हैं। तुम्हारा कल्याण हो, अब तुम लौट जाओ ॥40॥
 
Mahabaho! I have told you all these things in reply to the question you asked me about the number of Yugas. May you be blessed, now you may return. ॥ 40॥
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि तीर्थयात्रापर्वणि लोमशतीर्थयात्रायां कदलीषण्डे हनुमद्भीमसंवादे एकोनपञ्चाशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १४९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत लोमशतीर्थयात्राके प्रसंगमें कदलीवनके भीतर हनुमान‍्जी और भीमसेनका संवादविषयक एक सौ उनचासवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १४९॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)