Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.149.4-5: ‘वीर! मकरलय समुद्र को पार करते समय आपने जो अद्वितीय रूप धारण किया था, उसे देखने की मेरी बड़ी इच्छा है। उसे देखकर मुझे न केवल संतोष होगा, अपितु आपके वचनों पर भी विश्वास हो जाएगा।’ भीमसेन की यह बात सुनकर महाबली हनुमानजी मुस्कुराए और बोले-॥4-5॥ | mahabharat अध्याय 3.149: हनुमान्जीके द्वारा चारों युगोंके धर्मोंका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यत् ते तदाऽऽसीत् प्लवत: सागरं मकरालयम्।
रूपमप्रतिमं वीर तदिच्छामि निरीक्षितुम्॥ ४॥
एवं तुष्टो भविष्यामि श्रद्धास्यामि च ते वच:।
एवमुक्त: स तेजस्वी प्रहस्य हरिरब्रवीत्॥ ५॥
अनुवाद
‘वीर! मकरलय समुद्र को पार करते समय आपने जो अद्वितीय रूप धारण किया था, उसे देखने की मेरी बड़ी इच्छा है। उसे देखकर मुझे न केवल संतोष होगा, अपितु आपके वचनों पर भी विश्वास हो जाएगा।’ भीमसेन की यह बात सुनकर महाबली हनुमानजी मुस्कुराए और बोले-॥4-5॥
'Valiant one! I have a great desire to see the unique form that you had assumed while crossing the Makaralay sea. Seeing it will not only give me satisfaction, but will also make me believe in your words.' On hearing Bhimsena say this, the mighty Hanumanji smiled and said -॥ 4-5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥