श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 149: हनुमान‍्जीके द्वारा चारों युगोंके धर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  3.149.37 
लोके क्षीणे क्षयं यान्ति भावा लोकप्रवर्तका:।
युगक्षयकृता धर्मा: प्रार्थनानि विकुर्वते॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
जब संसार का नाश होता है, तो उसकी प्रेरक भावनाएँ भी नाश हो जाती हैं। आयु के क्षय से उत्पन्न धर्म मनुष्य की इच्छित इच्छाओं के विपरीत परिणाम देता है ॥37॥
 
When the world decays, its motivating sentiments also decay. Dharma born of the decay of the age yields results contrary to man's desired desires. ॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)