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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 149: हनुमान्जीके द्वारा चारों युगोंके धर्मोंका वर्णन
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श्लोक 35
श्लोक
3.149.35
ईतयो व्याधयस्तन्द्री दोषा: क्रोधादयस्तथा।
उपद्रवा: प्रवर्तन्ते आधय: क्षुद्भयं तथा॥ ३५॥
अनुवाद
थकावट, रोग, आलस्य, क्रोध आदि दोष, मानसिक रोग तथा भूख-प्यास का भय - ये सब क्लेश बढ़ते हैं ॥35॥
Fatigue, disease, laziness, anger etc. defects, mental illness and fear of hunger and thirst – all these troubles increase. 35॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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