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mahabharat 3.149.32: इन सबसे अत्यन्त व्याकुल होकर मनुष्य तपस्या करने लगते हैं। कुछ लोग भोग और स्वर्ग की इच्छा से यज्ञ करते हैं॥ 32॥   |   mahabharat अध्याय 3.149: हनुमान‍्जीके द्वारा चारों युगोंके धर्मोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 149: हनुमान‍्जीके द्वारा चारों युगोंके धर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  3.149.32 
यैरर्द्यमाना: सुभृशं तपस्तप्यन्ति मानवा:।
कामकामा: स्वर्गकामा यज्ञांस्तन्वन्ति चापरे॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
इन सबसे अत्यन्त व्याकुल होकर मनुष्य तपस्या करने लगते हैं। कुछ लोग भोग और स्वर्ग की इच्छा से यज्ञ करते हैं॥ 32॥
 
Being extremely troubled by all these, people start performing penance. Some people perform yagnas with the desire of enjoyment and heaven.॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)