श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 149: हनुमान‍्जीके द्वारा चारों युगोंके धर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  3.149.31 
सत्यात् प्रच्यवमानानां व्याधयो बहवोऽभवन्।
कामाश्चोपद्रवाश्चैव तदा वै दैवकारिता:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
सत्य से भ्रष्ट होने के कारण द्वापर के मनुष्यों में अनेक प्रकार के रोग उत्पन्न हो जाते हैं। उनके मन में अनेक प्रकार की इच्छाएँ उत्पन्न हो जाती हैं और वे अनेक दैवी विपत्तियों से भी पीड़ित हो जाते हैं॥31॥
 
Due to being corrupted from the truth, many kinds of diseases arise in the people of Dwapar. Many kinds of desires arise in their minds and they also become afflicted with many divine calamities.॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)