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mahabharat 3.149.27: द्वापर में हमारे धर्म के केवल दो चरण शेष रहते हैं, उस समय भगवान विष्णु का रूप पीला हो जाता है और वेद (ऋग्, यजु, साम और अथर्व) चार भागों में विभक्त हो जाते हैं॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 3.149: हनुमान‍्जीके द्वारा चारों युगोंके धर्मोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 149: हनुमान‍्जीके द्वारा चारों युगोंके धर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  3.149.27 
द्वापरे च युगे धर्मो द्विभागोन: प्रवर्तते।
विष्णुर्वै पीततां याति चतुर्धा वेद एव च॥ २७॥
 
 
अनुवाद
द्वापर में हमारे धर्म के केवल दो चरण शेष रहते हैं, उस समय भगवान विष्णु का रूप पीला हो जाता है और वेद (ऋग्, यजु, साम और अथर्व) चार भागों में विभक्त हो जाते हैं॥ 27॥
 
In Dvapara only two phases of our religion remain, at that time Lord Vishnu's form becomes yellow and the Vedas (Rig, Yaju, Sama and Atharva) are divided into four parts.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)