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mahabharat 3.149.26: त्रेतायुग के लोग तप और दान में तत्पर रहकर अपने धर्म से कभी विचलित नहीं होते थे। सभी लोग स्वामिभक्त और कर्मशील थे ॥26॥   |   mahabharat अध्याय 3.149: हनुमान‍्जीके द्वारा चारों युगोंके धर्मोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 149: हनुमान‍्जीके द्वारा चारों युगोंके धर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.149.26 
प्रचलन्ति न वै धर्मात् तपोदानपरायणा:।
स्वधर्मस्था: क्रियावन्तो नरास्त्रेतायुगेऽभवन्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
त्रेतायुग के लोग तप और दान में तत्पर रहकर अपने धर्म से कभी विचलित नहीं होते थे। सभी लोग स्वामिभक्त और कर्मशील थे ॥26॥
 
The people of Treta Yuga never deviated from their dharma by being ready for penance and charity. Everyone was self-devout and active. 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)