श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 149: हनुमान‍्जीके द्वारा चारों युगोंके धर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.149.23 
एतत् कृतयुगं नाम त्रैगुण्यपरिवर्जितम्
त्रेतामपि निबोध त्वं यस्मिन् सत्रं प्रवर्तते॥ २३॥
 
 
अनुवाद
यह तीनों गुणों से रहित सत्ययुग का वर्णन है। अब त्रेताक का वर्णन सुनो, जिसमें यज्ञ-कर्म का आरम्भ होता है।
 
This is a description of Satyayuga devoid of all three qualities. Now listen to the description of Tretaka, in which the yajna-karma begins.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)