श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 149: हनुमान‍्जीके द्वारा चारों युगोंके धर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.149.18 
ब्राह्मणा: क्षत्रिया वैश्या: शूद्राश्च कृतलक्षणा:।
कृते युगे समभवन् स्वकर्मनिरता: प्रजा:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र सभी लोग संयम और संयम जैसे शुभ गुणों से युक्त थे। सत्ययुग में सभी लोग अपने-अपने कर्तव्य पालन में तत्पर रहते थे॥18॥
 
Brahmins, Kshatriyas, Vaishyas and Shudras all were endowed with inherent auspicious characteristics like self-control and restraint. In Satyayuga all people were always ready to perform their duties.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)