श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 149: हनुमान‍्जीके द्वारा चारों युगोंके धर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.149.13 
देवदानवगन्धर्वयक्षराक्षसपन्नगा:।
नासन् कृतयुगे तात तदा न क्रयविक्रय:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
तात! कृतयुग में देवता, दानव, गंधर्व, यक्ष, राक्षस और नाग आदि कोई नहीं थे, अर्थात् वे आपस में भेदभाव नहीं करते थे। उस समय क्रय-विक्रय का प्रचलन नहीं था। 13॥
 
Tat! In Kritayuga, there were no gods, demons, Gandharvas, Yakshas, demons and serpents, that is, they did not discriminate among themselves. There was no practice of buying and selling at that time. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)