Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.149.11: हनुमानजी बोले- पिताश्री! पहला कृतयुग है। इसमें सनातन धर्म की पूर्ण स्थिति है। इसका नाम कृतयुग इसलिए पड़ा क्योंकि उस उत्तम युग के लोग अपने समस्त कर्तव्य पूरे कर लेते थे। उनके लिए करने को कुछ भी शेष नहीं रहता था (अतः 'कृतं एव सर्वं शुभं यस्मिन् युग' इस व्युत्पत्ति के अनुसार इसे 'कृत युग' कहा गया)। 11॥ | mahabharat अध्याय 3.149: हनुमान्जीके द्वारा चारों युगोंके धर्मोंका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हनूमानुवाच
कृतं नाम युगं तात यत्र धर्म: सनातन:।
कृतमेव न कर्तव्यं तस्मिन् काले युगोत्तमे॥ ११॥
अनुवाद
हनुमानजी बोले- पिताश्री! पहला कृतयुग है। इसमें सनातन धर्म की पूर्ण स्थिति है। इसका नाम कृतयुग इसलिए पड़ा क्योंकि उस उत्तम युग के लोग अपने समस्त कर्तव्य पूरे कर लेते थे। उनके लिए करने को कुछ भी शेष नहीं रहता था (अतः 'कृतं एव सर्वं शुभं यस्मिन् युग' इस व्युत्पत्ति के अनुसार इसे 'कृत युग' कहा गया)। 11॥
Hanumanji said- Father! The first is Kritayuga. There is complete state of Sanatan Dharma in it. It is named Kritayuga because the people of that good era used to complete all their duties. There was nothing left for them to do (hence, according to the etymology ‘Kritam eva sarvam shubham yasmin yuga’, it was called ‘Krit Yuga’). 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥