Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.149.10: भीमसेन बोले - कपिप्रवर! आप मुझे युगों की संख्या बताइये तथा प्रत्येक युग में आचार, धर्म, अर्थ और काम के तत्त्व, शुभ और अशुभ कर्म, उन कर्मों की शक्ति तथा उत्पत्ति और प्रलय के भावों का भी वर्णन कीजिये॥10॥ | mahabharat अध्याय 3.149: हनुमान्जीके द्वारा चारों युगोंके धर्मोंका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भीमसेन बोले - कपिप्रवर! आप मुझे युगों की संख्या बताइये तथा प्रत्येक युग में आचार, धर्म, अर्थ और काम के तत्त्व, शुभ और अशुभ कर्म, उन कर्मों की शक्ति तथा उत्पत्ति और प्रलय के भावों का भी वर्णन कीजिये॥10॥
Bhimsen said – Kapipravar! You tell me the number of Yugas and also describe the conduct, religion, elements of wealth and work, auspicious and inauspicious deeds, the power of those deeds and the feelings of origin and destruction in each Yuga. 10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥