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mahabharat 3.148.6: फिर मैंने बिना किसी प्रयास के ही महान कर्ता श्री रघुनाथजी का कार्य पूर्ण करने के लिए सौ योजन चौड़े समुद्र को पार कर लिया।   |   mahabharat अध्याय 3.148: हनुमान‍्जीका भीमसेनको संक्षेपसे श्रीरामका चरित्र सुनाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 148: हनुमान‍्जीका भीमसेनको संक्षेपसे श्रीरामका चरित्र सुनाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.148.6 
ततोऽहं कार्यसिद्धॺर्थं रामस्याक्लिष्टकर्मण:।
शतयोजनविस्तीर्णमर्णवं सहसाऽऽप्लुत:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
फिर मैंने बिना किसी प्रयास के ही महान कर्ता श्री रघुनाथजी का कार्य पूर्ण करने के लिए सौ योजन चौड़े समुद्र को पार कर लिया।
 
Then, without any effort, I crossed the sea which was hundred yojanas wide, to accomplish the task of Shri Raghunath, the great doer.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)