श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 148: हनुमान‍्जीका भीमसेनको संक्षेपसे श्रीरामका चरित्र सुनाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.148.20 
तदिहाप्सरसस्तात गन्धर्वाश्च सदानघ।
तस्य वीरस्य चरितं गायन्तो रमयन्ति माम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
हे निष्पाप भीम! इस स्थान पर गन्धर्व और अप्सराएँ वीर रघुनाथजी की कथाएँ गाकर मुझे आनन्दित करती हैं।
 
O sinless Bhima! At this place the Gandharvas and Apsaras keep me delighted by singing the tales of the valiant Raghunathji.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)