श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 148: हनुमान‍्जीका भीमसेनको संक्षेपसे श्रीरामका चरित्र सुनाना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.148.18 
सीताप्रसादाच्च सदा मामिहस्थमरिंदम।
उपतिष्ठन्ति दिव्या हि भोगा भीम यथेप्सिता:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुओं का दमन करने वाले भीमसेन! सीता की कृपा से यहाँ रहते हुए मैं सदैव अपनी इच्छानुसार दिव्य सुख प्राप्त करता हूँ॥18॥
 
O suppressor of enemies, Bhimasena! By the grace of Sita, while staying here, I always get divine pleasures as per my desire. ॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)