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mahabharat 3.147.9: यदि मैंने शास्त्रों के द्वारा परमेश्वर के स्वरूप को न जाना होता, तो केवल आप ही नहीं, मैं भी इस पर्वत को उसी प्रकार लांघ जाता, जैसे हनुमानजी समुद्र को लांघ गए थे।   |   mahabharat अध्याय 3.147: श्रीहनुमान् और भीमसेनका संवाद   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 147: श्रीहनुमान् और भीमसेनका संवाद  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.147.9 
यद्यागमैर्न विद्यां च तमहं भूतभावनम्।
क्रमेयं त्वां गिरिं चैव हनूमानिव सागरम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
यदि मैंने शास्त्रों के द्वारा परमेश्वर के स्वरूप को न जाना होता, तो केवल आप ही नहीं, मैं भी इस पर्वत को उसी प्रकार लांघ जाता, जैसे हनुमानजी समुद्र को लांघ गए थे।
 
Had I not known the nature of the Supreme Lord through the scriptures, then not just you, I would have crossed this mountain also, just as Hanumanji crossed the ocean.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)