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mahabharat 3.147.4: कुरुवीर भीमसेन के उन वचनों को सुनकर मृदुल मुस्कान के साथ वायुपुत्र हनुमान्‌जी ने वायुपुत्र भीमसेन से इस प्रकार कहा॥4॥   |   mahabharat अध्याय 3.147: श्रीहनुमान् और भीमसेनका संवाद   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 147: श्रीहनुमान् और भीमसेनका संवाद  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.147.4 
स वाक्यं कुरुवीरस्य स्मितेन प्रतिगृह्य तत्।
हनूमान् वायुतनयो वायुपुत्रमभाषत॥ ४॥
 
 
अनुवाद
कुरुवीर भीमसेन के उन वचनों को सुनकर मृदुल मुस्कान के साथ वायुपुत्र हनुमान्‌जी ने वायुपुत्र भीमसेन से इस प्रकार कहा॥4॥
 
Hearing those words of Kuruveer Bhimsen with a soft smile, Hanumanji, son of Vayu, said thus to Bhimsen, son of Vayu. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)