श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 147: श्रीहनुमान् और भीमसेनका संवाद  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.147.18 
पुच्छे प्रगृह्य तरसा हीनवीर्यपराक्रमम्।
सालोक्यमन्तकस्यैनं नयाम्यद्येह वानरम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
और उसने मन ही मन निश्चय किया कि ‘आज मैं इस बल और पराक्रम से रहित वानर की पूँछ पकड़कर शीघ्र ही इसे यमराज के धाम भेज दूँगा।’॥18॥
 
And he resolved within himself that 'Today, by grabbing the tail of this monkey, devoid of strength and valour, I will swiftly send him to the abode of Yamaraja.'॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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