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श्लोक 3.147.16  |
हनूमानुवाच
प्रसीद नास्ति मे शक्तिरुत्थातुं जरयानघ।
ममानुकम्पया त्वेतत् पुच्छमुत्सार्य गम्यताम्॥ १६॥ |
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| अनुवाद |
| हनुमानजी ने कहा- अनघ! मुझ पर दया करो। बुढ़ापे के कारण मुझमें उठने की शक्ति नहीं रही। अतः मुझ पर दया करो और इस पूंछ को हटाकर चले जाओ॥ 16॥ |
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| Hanumanji said- Anagh! Have mercy on me. Due to old age I have lost the strength to get up. So have mercy on me and remove this tail and go away.॥ 16॥ |
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