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mahabharat 3.146.92: हे पुरुषोत्तम! आज तुम्हें कितनी दूर जाना है, यह ठीक-ठीक बताओ। यहाँ से आगे यह पर्वत दुर्गम है। इस पर चढ़ना किसी के लिए भी अत्यन्त कठिन है॥ 92॥   |   mahabharat अध्याय 3.146: भीमसेनका सौगन्धिक कमल लानेके लिये जाना और कदलीवनमें उनकी हनुमान‍्जीसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.146.92 
क्व च त्वयाद्य गन्तव्यं प्रब्रूहि पुरुषर्षभ।
अत: परमगम्योऽयं पर्वत: सुदुरारुह:॥ ९२॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषोत्तम! आज तुम्हें कितनी दूर जाना है, यह ठीक-ठीक बताओ। यहाँ से आगे यह पर्वत दुर्गम है। इस पर चढ़ना किसी के लिए भी अत्यन्त कठिन है॥ 92॥
 
Best of men! Tell me exactly how far you have to go today? This mountain is inaccessible from here onwards. It is extremely difficult for anyone to climb it.॥ 92॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)