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mahabharat 3.146.91: बताओ, तुम कौन हो ? इस वन में क्यों और किस कारण से आये हो ? यहाँ मनुष्यों का कोई भाव नहीं है और मनुष्यों का प्रवेश वर्जित है ॥ 91॥   |   mahabharat अध्याय 3.146: भीमसेनका सौगन्धिक कमल लानेके लिये जाना और कदलीवनमें उनकी हनुमान‍्जीसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 146: भीमसेनका सौगन्धिक कमल लानेके लिये जाना और कदलीवनमें उनकी हनुमान‍्जीसे भेंट  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  3.146.91 
ब्रूहि कस्त्वं किमर्थं वा किमिदं वनमागत:।
वर्जितं मानुषैर्भावैस्तथैव पुरुषैरपि॥ ९१॥
 
 
अनुवाद
बताओ, तुम कौन हो ? इस वन में क्यों और किस कारण से आये हो ? यहाँ मनुष्यों का कोई भाव नहीं है और मनुष्यों का प्रवेश वर्जित है ॥ 91॥
 
Tell me, who are you? Why and for what reason have you come to this forest? There are no human feelings here and no entry for humans.॥ 91॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)