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mahabharat 3.146.89: परंतु मैं नहीं जानता कि आप जैसे बुद्धिमान लोग धर्म का नाश करने वाले तथा मन, वाणी और शरीर को दूषित करने वाले क्रूर कर्मों में कैसे प्रवृत्त होते हैं ॥ 89॥   |   mahabharat अध्याय 3.146: भीमसेनका सौगन्धिक कमल लानेके लिये जाना और कदलीवनमें उनकी हनुमान‍्जीसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 146: भीमसेनका सौगन्धिक कमल लानेके लिये जाना और कदलीवनमें उनकी हनुमान‍्जीसे भेंट  »  श्लोक 89
 
 
श्लोक  3.146.89 
क्रूरेषु कर्मसु कथं देहवाक्चित्तदूषिषु।
धर्मघातिषु सज्जन्ते बुद्धिमन्तो भवद्विधा:॥ ८९॥
 
 
अनुवाद
परंतु मैं नहीं जानता कि आप जैसे बुद्धिमान लोग धर्म का नाश करने वाले तथा मन, वाणी और शरीर को दूषित करने वाले क्रूर कर्मों में कैसे प्रवृत्त होते हैं ॥ 89॥
 
But I do not know how intelligent people like you indulge in cruel acts that destroy religion and pollute the mind, speech and body. ॥ 89॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)