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श्लोक  3.146.81 
केसरोत्करसम्मिश्रमशोकानामिवोत्करम्।
हिरण्मयीनां मध्यस्थं कदलीनां महाद्युतिम्॥ ८१॥
 
 
अनुवाद
सुनहरे केले के वृक्षों के बीच बैठे हुए महाबली हनुमानजी ऐसे लग रहे थे मानो केसर के फूलों की क्यारी में अशोक के फूलों का गुच्छा रख दिया गया हो।
 
The mighty Hanumanji, seated amidst the golden banana trees, looked as if a bunch of Ashoka flowers had been placed in a bed of saffron flowers. 81.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)