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mahabharat 3.146.8: उस समय मनोहर नेत्रों वाली सुन्दरी (सती-साध्वी) द्रौपदी भीमसेन से ऐसा कहकर वह पुष्प लेकर धर्मराज युधिष्ठिर को देने चली गईं।   |   mahabharat अध्याय 3.146: भीमसेनका सौगन्धिक कमल लानेके लिये जाना और कदलीवनमें उनकी हनुमान‍्जीसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.146.8 
एवमुक्त्वा शुभापाङ्गी भीमसेनमनिन्दिता।
जगाम पुष्पमादाय धर्मराजाय तत् तदा॥ ८॥
 
 
अनुवाद
उस समय मनोहर नेत्रों वाली सुन्दरी (सती-साध्वी) द्रौपदी भीमसेन से ऐसा कहकर वह पुष्प लेकर धर्मराज युधिष्ठिर को देने चली गईं।
 
At that time the beautiful (sati-sadhvi) Draupadi with charming eyes, saying this to Bhimasena and taking the flower, went to give it to Dharmaraja Yudhishthira.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)