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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 146: भीमसेनका सौगन्धिक कमल लानेके लिये जाना और कदलीवनमें उनकी हनुमान‍्जीसे भेंट  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  3.146.71 
तस्य लाङ्गूलनिनदं पर्वत: सुगुहामुखै:।
उद्‍गारमिव गौर्नर्दन्नुत्ससर्ज समन्तत:॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
पर्वत की सुन्दर गुफाओं में से उसकी पूँछ की मार की महान ध्वनि गूंज रही थी, मानो कोई बैल जोर से दहाड़ रहा हो।
 
The mountain echoed the great sound of the lashing of his tail through its beautiful cave-like openings, as if a bull were roaring loudly. 71.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)