Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.146.65: विशाल हाथियों की चिंघाड़ सुनकर महाकपि हनुमानजी, जो उस समय केले के वन में निवास कर रहे थे, समझ गये कि उनके भाई भीमसेन इसी ओर आये हैं।   |   mahabharat अध्याय 3.146: भीमसेनका सौगन्धिक कमल लानेके लिये जाना और कदलीवनमें उनकी हनुमान‍्जीसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 146: भीमसेनका सौगन्धिक कमल लानेके लिये जाना और कदलीवनमें उनकी हनुमान‍्जीसे भेंट  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  3.146.65 
तं तु नादं तत: श्रुत्वा मुक्तं वारणपुङ्गवै:।
भ्रातरं भीमसेनं तु विज्ञाय हनुमान् कपि:॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
विशाल हाथियों की चिंघाड़ सुनकर महाकपि हनुमानजी, जो उस समय केले के वन में निवास कर रहे थे, समझ गये कि उनके भाई भीमसेन इसी ओर आये हैं।
 
Hearing the cries of the huge elephants, the great ape-man Hanuman, who was then residing in the banana forest, understood that his brother Bhimasena had come this way. 65.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)