Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.146.5-6: भीम! देखो, यह दिव्य पुष्प कितना सुन्दर और सुंदर है! ऐसा प्रतीत होता है मानो इसकी सुगंध ही इसका स्वरूप है। यह मेरे मन को आनंदित कर रहा है। परंतप! मैं इसे धर्मराज को दान कर दूँगा। तुम इसे काम्यकवन स्थित आश्रम में ले जाकर मेरी मनोकामना पूर्ण करो।॥5-6॥ | mahabharat अध्याय 3.146: भीमसेनका सौगन्धिक कमल लानेके लिये जाना और कदलीवनमें उनकी हनुमान्जीसे भेंट । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भीम! देखो, यह दिव्य पुष्प कितना सुन्दर और सुंदर है! ऐसा प्रतीत होता है मानो इसकी सुगंध ही इसका स्वरूप है। यह मेरे मन को आनंदित कर रहा है। परंतप! मैं इसे धर्मराज को दान कर दूँगा। तुम इसे काम्यकवन स्थित आश्रम में ले जाकर मेरी मनोकामना पूर्ण करो।॥5-6॥
'Bhima! Look, how good and beautiful this divine flower is! It seems as if its fragrance is its very form. It is giving joy to my mind. Parantapa! I will gift it to Dharmaraj. You take it to the ashram in Kamyakavan to fulfill my wish.'॥ 5-6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥