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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 146: भीमसेनका सौगन्धिक कमल लानेके लिये जाना और कदलीवनमें उनकी हनुमान‍्जीसे भेंट  »  श्लोक 39-40
 
 
श्लोक  3.146.39-40 
विनर्दमानोऽतिभृशं सविद्युदिव तोयद:।
तेन शब्देन महता भीमस्य प्रतिबोधिता:॥ ३९॥
गुहां संतत्यजुर्व्याघ्रा निलिल्युर्वनवासिन:।
समुत्पेतु: खगास्त्रस्ता मृगयूथानि दुद्रुवु:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
वह बिजली से सुशोभित मेघ के समान जोर से गरजा। भीमसेन की भयानक गर्जना से जागकर व्याघ्र अपनी गुफाओं से भाग गए, वन के पशु वन में छिप गए, भयभीत पक्षी आकाश में उड़ गए और मृगों के झुंड दूर भाग गए। 39-40।
 
He roared loudly like a cloud adorned with lightning. The tigers, awakened by Bhimasena's terrifying roar, fled from their caves, the forest animals hid in the forest, the frightened birds flew into the sky and the herds of deer fled to far away. 39-40.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)