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mahabharat 3.146.3-4: जनमेजय! वह कमल अत्यंत सुंदर था, उसमें से दिव्य सुगन्ध निकल रही थी। शुभ्र द्रौपदी उसे देखकर वायु द्वारा लाये हुए तथा पृथ्वी पर फेंके हुए उस पवित्र, शुभ एवं उत्तम सुगन्धित कमल के पास पहुँचीं और बड़े हर्ष से भीमसेन से बोलीं -॥3-4॥   |   mahabharat अध्याय 3.146: भीमसेनका सौगन्धिक कमल लानेके लिये जाना और कदलीवनमें उनकी हनुमान‍्जीसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 146: भीमसेनका सौगन्धिक कमल लानेके लिये जाना और कदलीवनमें उनकी हनुमान‍्जीसे भेंट  »  श्लोक 3-4
 
 
श्लोक  3.146.3-4 
तदवैक्षत पाञ्चाली दिव्यगन्धं मनोरमम्।
अनिलेनाहृतं भूमौ पतितं जलजं शुचि॥ ३॥
तच्छुभा शुभमासाद्य सौगन्धिकमनुत्तमम्।
अतीव मुदिता राजन् भीमसेनमथाब्रवीत्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय! वह कमल अत्यंत सुंदर था, उसमें से दिव्य सुगन्ध निकल रही थी। शुभ्र द्रौपदी उसे देखकर वायु द्वारा लाये हुए तथा पृथ्वी पर फेंके हुए उस पवित्र, शुभ एवं उत्तम सुगन्धित कमल के पास पहुँचीं और बड़े हर्ष से भीमसेन से बोलीं -॥3-4॥
 
Janamejaya! That lotus was very beautiful, it was emitting divine fragrance. The auspicious Draupadi saw it and reached near that sacred, auspicious and most excellent fragrant lotus brought by the wind and thrown on the earth and spoke to Bhimasena in great joy -॥ 3-4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)