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mahabharat 3.146.23: निरन्तर बहते हुए झरनों का जल उस पर्वत की चोटी पर लटके हुए मोतियों के हार के समान प्रतीत होता था। उस पर्वत की गुफाएँ, कुंजियाँ, झरने, जल और घाटियाँ सभी सुन्दर थीं॥23॥   |   mahabharat अध्याय 3.146: भीमसेनका सौगन्धिक कमल लानेके लिये जाना और कदलीवनमें उनकी हनुमान‍्जीसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 146: भीमसेनका सौगन्धिक कमल लानेके लिये जाना और कदलीवनमें उनकी हनुमान‍्जीसे भेंट  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.146.23 
मुक्ताहारैरिव चितं च्युतै: प्रस्रवणोदकै:।
अभिरामदरीकुञ्जनिर्झरोदककन्दरम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
निरन्तर बहते हुए झरनों का जल उस पर्वत की चोटी पर लटके हुए मोतियों के हार के समान प्रतीत होता था। उस पर्वत की गुफाएँ, कुंजियाँ, झरने, जल और घाटियाँ सभी सुन्दर थीं॥23॥
 
The water of the continuously flowing springs appeared like a necklace of pearls hanging on the crest of that mountain. The caves, bowers, springs, water and ravines of that mountain were all beautiful.॥23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)