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mahabharat 3.146.12-13h: उस समय समस्त प्राणियों ने भीमसेन को महान धनुष-बाण लेकर जाते देखा। उस वायुपुत्र कुन्तीकुमार को कभी ग्लानि, चिन्ता, भय या घबराहट नहीं हुई। 12 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 3.146: भीमसेनका सौगन्धिक कमल लानेके लिये जाना और कदलीवनमें उनकी हनुमान‍्जीसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 146: भीमसेनका सौगन्धिक कमल लानेके लिये जाना और कदलीवनमें उनकी हनुमान‍्जीसे भेंट  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  3.146.12-13h 
ददृशु: सर्वभूतानि महाबाणधनुर्धरम्।
न ग्लानिर्न च वैक्लव्यं न भयं न च सम्भ्रम:॥ १२॥
कदाचिज्जुषते पार्थमात्मजं मातरिश्वन:।
 
 
अनुवाद
उस समय समस्त प्राणियों ने भीमसेन को महान धनुष-बाण लेकर जाते देखा। उस वायुपुत्र कुन्तीकुमार को कभी ग्लानि, चिन्ता, भय या घबराहट नहीं हुई। 12 1/2॥
 
At that time all living beings saw Bhimasena going with the great bow and arrows. That Vayuputra Kuntikumar never felt guilty, distressed, afraid or nervous. 12 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)