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mahabharat 3.146.10: ऐसे और भी पुष्प लाने की इच्छा से वह तुरन्त पूर्वोक्त वायु की ओर मुख करके उस ईशान कोण की ओर चल पड़ा, जहाँ से वह पुष्प आया था॥10॥   |   mahabharat अध्याय 3.146: भीमसेनका सौगन्धिक कमल लानेके लिये जाना और कदलीवनमें उनकी हनुमान‍्जीसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 146: भीमसेनका सौगन्धिक कमल लानेके लिये जाना और कदलीवनमें उनकी हनुमान‍्जीसे भेंट  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.146.10 
वातं तमेवाभिमुखो यतस्तत् पुष्पमागतम्।
आजिहीर्षुर्जगामाशु स पुष्पाण्यपराण्यपि॥ १०॥
 
 
अनुवाद
ऐसे और भी पुष्प लाने की इच्छा से वह तुरन्त पूर्वोक्त वायु की ओर मुख करके उस ईशान कोण की ओर चल पड़ा, जहाँ से वह पुष्प आया था॥10॥
 
Desiring to bring more such flowers, he immediately headed towards the north-east corner facing the aforesaid wind, from where the flower had come.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)