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श्लोक  3.146.1 
वैशम्पायन उवाच
तत्र ते पुरुषव्याघ्रा: परमं शौचमास्थिता:।
षड्रात्रमवसन् वीरा धनंजयदिदृक्षव:॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - 'जनमेजय! वे वीर सिंह पाण्डव अर्जुन को देखने के लिए उत्सुक होकर परम पवित्रता के साथ वहाँ छह रात तक रुके।
 
Vaishmpayana says, 'Janamejaya! That brave man-lion Pandava, eager to see Arjun, stayed there for six nights with utmost purity.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)