श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 145: घटोत्कच और उसके साथियोंकी सहायतासे पाण्डवोंका गन्धमादन पर्वत एवं बदरिकाश्रममें प्रवेश तथा बदरीवृक्ष,नर-नारायणाश्रम और गंगाका वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.145.9 
लोमश: सिद्धमार्गेण जगामानुपमद्युति:।
स्वेनैव स प्रभावेण द्वितीय इव भास्कर:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
अतुलनीय तेजस्वी महर्षि लोमश अपने ही प्रभाव से सिद्धमार्ग अर्थात् आकाश के मार्ग पर दूसरे सूर्य के समान चलने लगे॥9॥
 
The incomparable Tejasvi Maharishi Lomash, by his own influence, started walking on the Siddhamarg i.e. the path of the sky, like the second sun. 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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