श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 145: घटोत्कच और उसके साथियोंकी सहायतासे पाण्डवोंका गन्धमादन पर्वत एवं बदरिकाश्रममें प्रवेश तथा बदरीवृक्ष,नर-नारायणाश्रम और गंगाका वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.145.8 
एवमुक्त्वा तत: कृष्णामुवाह स घटोत्कच:।
पाण्डूनां मध्यगो वीर: पाण्डवानपि चापरे॥ ८॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर वीर घटोत्कच द्रौपदी को साथ लेकर पाण्डवों के बीच चलने लगा और अन्य राक्षस भी पाण्डवों को अपने कंधों पर उठाकर साथ ले गए।
 
Saying this, the brave Ghatotkacha started walking among the Pandavas carrying Draupadi along with him, and the other demons took the Pandavas along as well (carrying them on their shoulders).
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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