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mahabharat 3.145.48: चारों ओर से खिले हुए कमल और कुमुदिनी वृक्ष उनकी शोभा बढ़ा रहे थे। उन सुन्दर सरोवरों को देखकर पाण्डव वहाँ आनन्दपूर्वक विचरण करने लगे। 48।   |   mahabharat अध्याय 3.145: घटोत्कच और उसके साथियोंकी सहायतासे पाण्डवोंका गन्धमादन पर्वत एवं बदरिकाश्रममें प्रवेश तथा बदरीवृक्ष,नर-नारायणाश्रम और गंगाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 145: घटोत्कच और उसके साथियोंकी सहायतासे पाण्डवोंका गन्धमादन पर्वत एवं बदरिकाश्रममें प्रवेश तथा बदरीवृक्ष,नर-नारायणाश्रम और गंगाका वर्णन  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  3.145.48 
कमलै: सोत्पलैश्चैव भ्राजमानानि सर्वश:।
पश्यन्तश्चारुरूपाणि रेमिरे तत्र पाण्डवा:॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
चारों ओर से खिले हुए कमल और कुमुदिनी वृक्ष उनकी शोभा बढ़ा रहे थे। उन सुन्दर सरोवरों को देखकर पाण्डव वहाँ आनन्दपूर्वक विचरण करने लगे। 48।
 
The blooming lotus and lily trees enhanced their beauty from all sides. The Pandavas started roaming there happily, seeing those beautiful lakes. 48.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)