श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 145: घटोत्कच और उसके साथियोंकी सहायतासे पाण्डवोंका गन्धमादन पर्वत एवं बदरिकाश्रममें प्रवेश तथा बदरीवृक्ष,नर-नारायणाश्रम और गंगाका वर्णन  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  3.145.41 
तत्रापश्यत धर्मात्मा देवदेवर्षिपूजितम्।
नरनारायणस्थानं भागीरथ्योपशोभितम्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
धर्मात्मा युधिष्ठिर ने वहाँ भगवान नारायण का निवास देखा, जो देवताओं और ऋषियों द्वारा पूजित था और भागीरथी* गंगा से सुशोभित था।
 
The virtuous Yudhishthira saw there the abode of Lord Narayana, worshipped by the gods and sages and adorned by the Bhagirathi* Ganga.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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